खाकी के पहरे को मात: बस्ती में युवा कांग्रेस का अनोखा विरोध, पुलिस को चकमा देकर भैंस के सामने बजाई ‘बीन’
हाउस अरेस्ट बेअसर: बहरी सरकार को आईना दिखाने के लिए युवा नेताओं का अनूठा प्रदर्शन, गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में लोकतंत्र का अनूठा पाठ: पुलिस के पहरे को मात दे भैंस के सामने बजाई ‘बीन’, गूंजी युवाओं की हुंकार
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में युवा कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन इन दिनों सियासी गलियारों में गहरी चर्चा का विषय बन गया है। जब सत्ता और पुलिसिया तंत्र दमन के बल पर विरोधी स्वरों को दबाने की कोशिश करता है, तब लोकतांत्रिक तेवर अपने लिए नए और रचनात्मक रास्ते तलाश ही लेते हैं। बस्ती में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां पुलिस के कड़े पहरे और हाउस अरेस्ट के बावजूद युवा नेताओं ने अनोखे अंदाज में सरकार को आईना दिखाया।
खाकी के पहरे और हाउस अरेस्ट को दी मात
विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी थी। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुधीर यादव ‘शंख’, प्रदेश सचिव दीपक शुक्ला और एनएसयूआई (NSUI) के प्रदेश सचिव उमाशंकर त्रिपाठी जैसे प्रमुख युवा नेताओं को पुलिस ने पहले ही उनके घरों में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया था।
मकसद साफ था—छात्रों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ उठने वाली आवाज और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को शुरुआती चरण में ही दबा दिया जाए। लेकिन, जुझारू तेवर वाले इन युवा नेताओं ने पुलिस की इस किलेबंदी को चकमा देते हुए प्रशासन के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
’भैंस के आगे बीन बजाना’: बहरी सरकार पर तीखा कटाक्ष
पुलिस की आँखों में धूल झोंककर नेताओं ने विरोध का जो रास्ता चुना, वह मुहावरेदार राजनीति का एक जीवंत उदाहरण बन गया। नेताओं ने सड़क पर उतरकर भैंस के सामने ‘बीन’ बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
यह महज एक सांकेतिक विरोध नहीं था, बल्कि देश के गृह मंत्री से जवाब मांगने और छात्रों की सुध न लेने वाली उदासीन व्यवस्था पर एक करारा प्रहार था। इस अनोखे प्रदर्शन के जरिए यह संदेश स्पष्ट था कि मौजूदा सत्ता छात्रों के प्रति बहरी हो चुकी है, जिसके सामने न्याय की गुहार लगाना या तर्क रखना ठीक ‘भैंस के आगे बीन बजाने’ जैसा ही निरर्थक साबित हो रहा है।
क्यों सुलग रहा है यह गुस्सा?
- छात्रों पर दमन: देश भर में शिक्षण संस्थानों और छात्रों की आवाज को कुचलने वाली नीतियों के खिलाफ यह विरोध स्वाभाविक था।
- नैतिक जिम्मेदारी की मांग: युवा कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि युवाओं पर हो रहे अत्याचारों की नैतिक जिम्मेदारी देश के गृह मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व की है।
- लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा: नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि पुलिसिया कार्रवाई और लाठी-डंडों के जोर पर युवाओं के हौसलों को तोड़ा नहीं जा सकता।
“छात्रों की आवाज दबेगी नहीं, संघर्ष रुकेगा नहीं।”
बस्ती की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दमनकारी नीतियां चाहे जितनी भी मजबूत क्यों न हों, जब युवा अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो सत्ता के तमाम पहरे बौने साबित हो जाते हैं।









